UP में बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर मचा बवाल, बेलआउट पैकेज पर उठे सवाल

UP News: उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने जिन छह राज्यों — आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश — को विद्युत क्षेत्र में निजीकरण के लिए चिह्नित किया है, उनमें यूपी का नाम भी शामिल है। इसके तहत केंद्र ने शर्त रखी है कि यदि ये राज्य अपनी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) में 26 फीसदी तक निजी हिस्सेदारी देंगे, तो उन्हें बेलआउट पैकेज (वित्तीय राहत) दिया जाएगा।

इसी प्रस्ताव को लेकर अब राज्य में सियासत और विवाद दोनों तेज हो गए हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूपी को जानबूझकर इस सूची में शामिल किया गया है, जबकि प्रदेश की वित्तीय स्थिति बाकी पांच राज्यों से कहीं बेहतर है।

बेलआउट पैकेज पर उठे सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश को बेलआउट पैकेज में शामिल कर निजीकरण का रास्ता खोला जा रहा है। जबकि यूपी की बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब नहीं है कि बेलआउट पैकेज की जरूरत पड़े। यह साफ तौर पर निजीकरण की साजिश है, जिसे किसी भी हाल में रोका जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि ऊर्जा विभाग के कुछ अधिकारी पहले से ही निजीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं और केंद्र से मिलने वाले बेलआउट पैकेज को ‘बहाना’ बनाकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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यूपी की स्थिति बाकी राज्यों से बेहतर
वर्मा ने छह राज्यों के वित्तीय आंकड़े जारी करते हुए कहा कि यूपी ने विभिन्न वित्तीय संस्थानों से लिए गए कुल ऋणों में सबसे नीचे स्थान पाया है।
राजस्व से चुकाए न जा सकने वाले ऋण की तुलना में भी यूपी की स्थिति बाकी सभी राज्यों से बेहतर है।

राज्य                      कुल ऋण (₹ करोड़)                राजस्व से न चुकाया जा सकने वाला ऋण (₹ करोड़ में))
आंध्र प्रदेश                     65,710                                                 50,851
मध्य प्रदेश                     50,844                                                 35,211
महाराष्ट्र                        84,170                                                 39,605
राजस्थान                      92,225                                                 58,514
तमिलनाडु                  1,73,520                                               1,37,979
उत्तर प्रदेश                    67,936                                                  29,212

वर्मा के अनुसार, यूपी का “नॉन-रेवेन्यू रीकवरेबल लोन रेश्यो” मात्र 11 प्रतिशत है, जबकि राजस्थान 51%, तमिलनाडु 76%, आंध्र प्रदेश 49% और महाराष्ट्र 13% पर हैं।

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उपभोक्ता परिषद की मांग
परिषद ने मांग की है कि राज्य सरकार बेलआउट पैकेज को ठुकराकर निजीकरण प्रस्ताव को तुरंत रद्द करे। परिषद का कहना है कि यदि राज्य सरकार निजी हाथों में बिजली वितरण का काम सौंपती है, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम उपभोक्ताओं को होगा — बिजली दरें बढ़ेंगी, सेवा गुणवत्ता गिरेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति और कमजोर हो जाएगी।

राज्य सरकार का रुख
राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ऊर्जा विभाग के सूत्रों का कहना है कि केंद्र से मिलने वाले बेलआउट पैकेज पर विचार किया जा रहा है ताकि बिजली कंपनियों के घाटे को कम किया जा सके।

हालांकि, उपभोक्ता परिषद ने साफ कहा है कि बेलआउट पैकेज की आड़ में निजीकरण किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा।

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