
मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और प्राणायाम जरूरी, मुकेश शर्मा ने दी सलाह
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मुकेश शर्मा की अपील, तनाव से बचने के लिए अपनाएं योग, ध्यान और प्राणायाम; मानसिक परेशानी होने पर लें विशेषज्ञ की सलाह।
Lucknow: शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर जीवन के लिए बेहद जरूरी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव और कम समय में अधिक हासिल करने की चाह लोगों के मानसिक सुकून को प्रभावित कर रही है। ऐसे में सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या, योग, ध्यान और प्राणायाम को अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। यह कहना है पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा का।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मुकेश शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंद लोगों को समय पर उचित परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर दिया। हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाना और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों को सुनना जरूरी
मुकेश शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर चुके लोगों के अनुभवों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनकी बातों और जरूरतों को समझकर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और नीतियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कुछ लोग मानसिक परेशानी को टोना-टोटका या ऊपरी साया मानकर झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। इससे समस्या के समाधान में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों को झाड़-फूंक के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए आवश्यक परामर्श और उपचार संबंधी सहायता ली जा सकती है।
युवाओं में तनाव और अवसाद को समझना जरूरी
मुकेश शर्मा ने कहा कि किशोरों और युवाओं में मनचाही चीज हासिल नहीं कर पाने, चुनौतियों से घबराने और दूसरों की प्रतिक्रिया के डर से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे उनकी समस्याओं को समझें, उनकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी होने पर व्यक्ति को अकेला महसूस नहीं होने देना चाहिए। सकारात्मक माहौल और समय पर सहायता मिलने से उसे अपनी स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।
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मानसिक परेशानी के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह से दिखाई दे सकती हैं। लगातार नींद न आना, उलझन, घबराहट, हीन भावना, नकारात्मक सोच, बार-बार एक ही विचार आना, अनावश्यक डर या शक होना और नशे की लत जैसे संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ लोगों को ऐसी आवाजें सुनाई देने का अनुभव भी हो सकता है, जिन्हें दूसरे लोग नहीं सुनते।
यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें या दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इन लक्षणों को छिपाने या उन्हें लेकर शर्म महसूस करने के बजाय समय पर मदद लेना महत्वपूर्ण है।
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तनाव से बचने के लिए अपनाएं स्वस्थ दिनचर्या
मुकेश शर्मा ने कहा कि चिंता और तनाव किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और नींद संबंधी परेशानियों सहित शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। इसलिए तनाव के कारणों को पहचानना और उनसे निपटने के स्वस्थ तरीके अपनाना जरूरी है।
उन्होंने नियमित योग, ध्यान और प्राणायाम करने, पर्याप्त नींद लेने, संतुलित दिनचर्या बनाए रखने और नशे से दूर रहने की सलाह दी। लंबे समय तक बनी रहने वाली शारीरिक बीमारियां भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए नियमित स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान देना चाहिए।
मुकेश शर्मा ने अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता दी जाए। मानसिक परेशानी होने पर उसे कमजोरी या सामाजिक कलंक न समझें, बल्कि समय पर चिकित्सकीय सहायता लें और दूसरों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं।
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