भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे अपनी जमीन का इस्तेमाल: गोतबाया राजपक्षे

कोलंबो। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने कहा कि उनका देश किसी भी ऐसी गतिविधि के लिए अपनी भूमि का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हो। उन्होंने यह आश्वासन भारत के विदेशी सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ हुई मुलाकात में दिया।

इस दौरान राजपक्षे ने चीन और श्रीलंका के संबंधों के बारे में किसी तरह का संदेह नहीं करने को कहा। द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए चार दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका गए विदेश सचिव ने अपनी यात्रा के आखिरी दिन राष्ट्रपति से मुलाकात की।

राष्ट्रपति राजपक्षे ने विदेश सचिव को बताया कि उनकी सरकार ने भारतीय निवेशकों को देश में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही सरकार त्रिंकोमाली तेल टैंकरों से जुड़े विवाद को इस तरह हल करना चाहती है, जिससे दोनों देशों को लाभ हो।

बता दें कि त्रिंकोमाली स्थित बंदरगाह में एक तेल का कुआं है जो दशकों से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी की प्रमुख कड़ी है।

दरअसल, चीन श्रीलंका में बंदरगाहों सहित विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अरबों डालर का निवेश कर रहा है। यह भारत के लिए चिंता का सबब है। भारत कोलंबो के तट पर चीन की कंपनियों द्वारा एक नए शहर बसाने की योजना से भी चिंतित है।

श्रृंगला ने उठाया 13वें संशोधन का मुद्दा

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे के समक्ष 13वें संशोधन का मुद्दा उठाया और इसके प्रविधानों के पूर्ण कार्यान्वयन के भारत के रुख को दोहराया।

दरअसल तेरहवें संशोधन में तमिल समुदाय को सत्ता के हस्तांतरण का प्रावधान है। भारत 13वें संशोधन को लागू करने के लिए श्रीलंका पर दबाव बना रहा है, जिसे 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद पेश किया गया था।

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