नाम और तस्वीर का इस्तेमाल न करें पार्टियां, राजनीति में नहीं आऊंगा: टिकैत

Rakesh Tikait

मुजफ्फरनगर (उप्र)। एक साल से ज्यादा समय तक चले किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे राकेश टिकैत अब मुजफ्फरनगर स्थित अपने घर लौट गए हैं। गाजीपुर बॉर्डर से आंदोलनकारी किसानों के आखिरी जत्थे के साथ रवाना हुए राकेश टिकैत जब मेरठ पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ।

इस दौरान जब एक राजनीतिक दल के पोस्टर में छपी उनकी तस्वीर को लेकर पूछा गया तो टिकैत ने साफ किया कि वह राजनीति में नहीं कूदेंगे।

राकेश टिकैत ने कहा, ‘मैं कोई चुनाव लड़ने नहीं जा रहा हूं। किसी पार्टी को मेरे नाम और तस्वीर का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’

राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता हैं। यह संगठन किसान आंदोलन में प्रमुख भागीदार था।

छोड़ दी थी दिल्ली पुलिस की नौकरी

राकेश टिकैत आंदोलन को लेकर काफी मुखर थे और मीडिया में छाए रहे। चुनावी समर में उतरने को लेकर राकेश टिकैत ने साफ कर दिया है कि वे राजनीति से दूर ही रहेंगे। राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्सटेबल रहे, लेकिन 1992-93 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी।

राकेश टिकैत ने भले ही आज चुनाव में उतरने से इनकार किया हो, लेकिन वह दो बार मैदान में उतर चुके हैं। 2007 में वह मुजफ्फरनगर की खतौली सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव में उतरे थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद वह 2014 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा सीट से रालोद के टिकट पर लड़े, लेकिन एक बार फिर से हार ही हाथ लगी।

किसान संगठनों ने 15 जनवरी को अब एक समीक्षा बैठक बुलाने का फैसला लिया है, जिसमें वे सरकार की ओर से किए गए वादों पर कितना काम हुआ है, उस पर चर्चा करेंगे।

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